‘महावतार नरसिम्हा’ रिव्यू : पौराणिक कथा में लगा फिल्मी तड़का

फिल्म के बारे में

अश्विन कुमार के निर्देशन में बनी फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ पौराणिक कथा पर आधारित एक एनिमेटड फिल्म है। इसका निर्माण क्लीम प्रोडक्शन्स और होम्बले फिल्मस् ने मिलकर किया है। इस फिल्म का प्रीमियर 25 नवंबर 2024 को 55वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में हुआ था और अब 25 जुलाई 2025 को इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया। यह फिल्म ‘महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स’ की पहली कड़ी है, जिसमें भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों (दशावतारों) पर सात फिल्में बनाने की योजना है।

कहानी और विषयवस्तु

 ‘महावतार नरसिम्हा’ राक्षसराज हिरण्यकशिपु की कथा को नए रूप में प्रस्तुत करती है, जो कठोर तपस्या के द्वारा अमोघ शक्तियां प्राप्त करता है और स्वयं को ईश्वर घोषित कर देता है। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त होता है। इसी द्वंद्व के बीच भगवान विष्णु नरसिंह रूप में अवतरित होकर प्रह्लाद की रक्षा करते हैं और धर्म की पुनः स्थापना करते हैं। वैसे तो यह पौराणिक कथा हम बचपन से सुनते चले आ रहे हैं, लेकिन इस फिल्म में जो एक्शन का तड़का लगा है, उसने सभी दृश्यों को जीवंत कर दिया। एक एनिमेशन फिल्म होने के बावजूद इन दृश्यों को देखकर दर्शकों में ‘भक्ति रस’ प्रवाहित होने लगता है।

यह फिल्म आत्मा और अहंकार के बीच टकराव, भक्ति की शक्ति और धर्म की सर्वोच्चता जैसे गहन विषयों को छूती है। फिल्म केवल एक दृश्यात्मक तमाशा न बनकर आध्यात्मिक गहराई को महत्व देती है—प्रह्लाद की श्रद्धा, हिरण्यकशिपु की मानसिक स्थिति और नरसिंह की दिव्यता को भावनात्मक विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

दृश्यांकन और एनीमेशन

फिल्म को भारतीय एनीमेशन का एक ऐतिहासिक प्रयास माना गया है। Maya, Houdini, Blender और Nuke जैसे अत्याधुनिक टूल्स की मदद से ब्रह्मलोक, वराह अवतार के दृश्य और नरसिंह के रूपांतरण जैसे अद्भुत पौराणिक दृश्य रचे गए हैं। ये दृश्य विशालता और सौंदर्य में ‘ऑपेराटिक’ (grand opera) की अनुभूति देते हैं।

वराह अवतार और नरसिंह के प्रकट होने जैसे दृश्यों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। साउंड डिजाइनर सैम सी.एस. द्वारा रचित पृष्ठभूमि संगीत—जिसमें वैदिक मंत्र, जनजातीय ताल व ऑर्केस्ट्रा सम्मिलित हैं—दृश्यों की तीव्रता को और भी बढ़ा देते हैं।

हालांकि, कुछ शांत या संवाद-प्रधान दृश्यों में एनीमेशन की गुणवत्ता वीडियो गेम के कटसीन जैसी प्रतीत होती है—जहाँ किरदारों की गति स्वाभाविक नहीं लगती और भीड़ या पृष्ठभूमि कभी-कभी अधूरी लगती है।

कथा प्रवाह और गति

फिल्म की गति को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इसका पहला भाग भावनात्मक रूप से सशक्त है, वहीं कुछ लोग इसे धीमा और दोहरावपूर्ण बताते हैं। विशेष रूप से शुरुआती घंटा कथानक को धीमा कर देता है। प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु के बीच के टकराव ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़े रखा, विशेषकर चरमोत्कर्ष में नरसिंह के प्रकट होने पर। इसप्रकार फिल्म के प्रवाह और गति में हमें मिलाजुला रूप देखने को मिलता है।

अभिनय और ध्वनि संयोजन

हिंदी संस्करण में आदित्य राज शर्मा, हरिप्रिया मट्टा, और संकेत जायसवाल सहित कई कलाकारों की आवाजों ने पात्रों में जान फूंक दी है—विशेष रूप से प्रह्लाद की शांत भक्ति और हिरण्यकशिपु की क्रूरता। हालांकि कुछ वॉयस आर्टिस्ट्स की पहचान गुप्त रखी गई है, परंतु उनके योगदान ने फिल्म की आत्मा को सशक्त बनाया है।

सैम सी.एस. का पृष्ठभूमि संगीत विशेष रूप से सराहनीय है। यह संस्कृत मंत्रों, जनजातीय तालों और सिम्फनी की मदद से भावनात्मक एवं युद्ध दृश्यों को एक नई ऊंचाई प्रदान करता है।

बॉक्स ऑफिस पर प्रभाव

₹15–20 करोड़ के सीमित बजट वाली इस फिल्म ने रिलीज़ के पहले दिन ₹1.75 करोड़ की कमाई की, जो पाँचवें दिन तक ₹29.26 करोड़ पहुंच गई। 10 दिनों के भीतर इसने ₹105 करोड़ से अधिक की कमाई की, जिससे यह भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एनिमेटेड फिल्म बन गई।

सांस्कृतिक और सिनेमाई महत्व

‘महावतार नरसिम्हा’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह एक सांस्कृतिक उपलब्धि है। इसने यह दिखाया है कि भारतीय एनिमेशन में कितनी संभावनाएं हैं, विशेषकर यदि पौराणिक कथाओं को श्रद्धा, भावनात्मक सच्चाई और कलात्मक प्रतिबद्धता के साथ प्रस्तुत किया जाए।

महावतार यूनिवर्स की आगामी फिल्में—महावतार परशुराम (2027), महावतार रघुनंदन (2029), महावतार द्वारकाधीश (2031), महावतार गोकुलानंद (2033), महावतार कल्कि,भाग-1 (2035) और महावतार कल्कि,भाग-2 (2037)—इस दिशा को और गहराई देंगी।

कुल मिलाकर

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ‘महावतार नरसिम्हा’ एक साहसिक, आध्यात्मिक और दृश्यात्मक रूप से समृद्ध फिल्म है, जो मात्र मनोरंजन ही नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बनने का प्रयास करती है। इसकी गति में असंतुलन और तकनीकी सीमाओं के बावजूद, यह भारतीय एनिमेशन और पौराणिक कथा-प्रस्तुति में एक ऐतिहासिक कदम है। यह दिखाता है कि श्रद्धा, परिश्रम और सच्चे भाव से बनाई गई एनीमेशन फिल्में भी दर्शकों के हृदय तक पहुँच सकती हैं और एक ‘मिथकीय सिनेमा’ की नींव रख सकती हैं। इसके आने वाले अध्यायों में और प्रगति की आशा की जा सकती है।

ट्रेलर देखें

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